गोंडा: कारोबारी विनोद साहनी की हत्या के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विनोद साहनी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर जहां परिवार और समर्थकों की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है, वहीं अब मंत्री संजय निषाद को लेकर भी गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए गए हैं।
एक बयान में संजय निषाद पर आरोप लगाया गया है कि वह कथित तौर पर मामले को शांत करने और विवाद को आगे नहीं बढ़ने देने की बात कर रहे हैं। बयान में कहा गया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल सरकार के खिलाफ जा सकता है और इसी वजह से मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बयान में बीजेपी गठबंधन में शामिल नेताओं और मंत्रियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष ने कहा कि कुछ मंत्री समाज के हितों की अनदेखी करते हुए सत्ता के साथ खड़े हैं। उन पर ठेके, पट्टे, टेंडर, पैसे और राजनीतिक पदों से जुड़े हितों के लिए समाज के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया गया।
विनोद साहनी की हत्या को लेकर बयान में यह भी दावा किया गया कि कुछ लोग न्याय दिलाने के बजाय कथित तौर पर इस घटना को राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे। आरोप लगाने वाले पक्ष ने इसे समाज के साथ विश्वासघात बताते हुए ऐसे नेताओं की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि विनोद साहनी की मौत के बाद न्याय की मांग को कमजोर करने के लिए कथित तौर पर किसी तरह की डील या समझौते की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, इस संबंध में भी कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल राजनीतिक आरोपों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
बयान में समाज से अपील की गई कि वह ऐसे नेताओं और उनके राजनीतिक रवैये को पहचाने। साथ ही आरोप लगाने वाले पक्ष ने आगामी चुनाव में ऐसे नेताओं को वोट नहीं देने की अपील भी की।
विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर परिवार की ओर से लगातार न्याय और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। मामले में पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच पूरी होने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
फिलहाल, इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। संजय निषाद या संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना जरूरी होगा।






