नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान सबसे पहले भारत की जमीन का मुद्दा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लद्दाख और गलवान से जुड़े सीमा विवाद पर भारत को चीन के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
संजय राउत ने सवाल उठाया कि चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर कई दौर की बातचीत होने के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में कितना सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि बातचीत के साथ-साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि भारत अपनी जमीन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।
राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि जब चीन के राष्ट्रपति भारत में हैं, तो उनके साथ होने वाली बातचीत में सीमा विवाद को प्रमुखता दी जाए। उनके मुताबिक, भारत सरकार को चीन से यह बात करनी चाहिए कि लद्दाख और गलवान क्षेत्र से जुड़ी भारतीय चिंताओं का स्थायी समाधान कैसे निकाला जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था। इसके बाद सीमा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी होती रही हैं।
अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे समय में संजय राउत का बयान विपक्ष की ओर से सरकार पर दबाव बनाने वाला माना जा रहा है। राउत का कहना है कि भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
संजय राउत ने यह भी सवाल किया कि चीन के साथ कई दौर की बातचीत के बाद जमीनी स्तर पर भारत को क्या हासिल हुआ है। उन्होंने सरकार से बातचीत के परिणामों को लेकर स्पष्टता की मांग की। उनका कहना है कि चीन के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ते समय भारत के रणनीतिक और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता में होने चाहिए।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर नई कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ देश की भी नजरें टिकी हैं।
राउत के बयान ने एक बार फिर भारत-चीन सीमा विवाद को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत से सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर क्या संदेश सामने आता है।







