अलीगढ़: उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्राओं के प्रदर्शन का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के अब्दुल्लाह हॉल में खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं में नाराजगी है। छात्राओं ने कथित तौर पर हॉस्टल में मिलने वाले खाने की क्वालिटी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और थाली-चम्मच बजाकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
छात्राओं का आरोप है कि अब्दुल्लाह हॉल में उन्हें परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध जताया। थाली और चम्मच बजाकर किए गए प्रदर्शन के जरिए छात्राओं ने हॉस्टल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाने की कोशिश की।

प्रदर्शन के दौरान मामला उस समय और गरमा गया, जब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के मेल मेंबर्स पर छात्राओं के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए गए। इस घटनाक्रम के बाद छात्राओं में नाराजगी और बढ़ने की बात सामने आ रही है। हालांकि, धक्का-मुक्की के आरोपों को लेकर आधिकारिक तौर पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भोजन की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है। उनका आरोप है कि लंबे समय से खाने को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद उन्होंने विरोध का रास्ता अपनाया। छात्राओं ने मांग की है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने थाली-चम्मच बजाकर अपनी आवाज बुलंद की। इस तरह का प्रदर्शन आमतौर पर भोजन की गुणवत्ता और हॉस्टल व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर करने के लिए किया जाता है। मामले के सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका भी चर्चा में है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अब्दुल्लाह हॉल के खाने की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने पहले कोई जांच कराई थी या नहीं। साथ ही, प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों पर लगाए गए धक्का-मुक्की के आरोपों की भी जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
छात्राओं के प्रदर्शन ने एक बार फिर हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और छात्राओं की मांगों पर किस तरह कार्रवाई की जाती है।






