काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड और उससे जुड़ी प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचा दी है। आपदा के बाद लगातार चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियान के बीच मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 पहुंच गई है। नेपाल पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। वहीं, करीब 4,875 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
गुरुवार को आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान का नौवां दिन था। नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा। मलबे, बाढ़ के पानी और दुर्गम इलाकों में लगातार लोगों की तलाश की जा रही है।
मौतों का आंकड़ा 1,252 तक पहुंचा
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार तक अलग-अलग प्रभावित जिलों से कुल 1,252 शव बरामद किए जा चुके थे।
बचाव दलों को अभी भी कई इलाकों में मलबे और बाढ़ के बाद जमा सामग्री के बीच तलाशी अभियान चलाना पड़ रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि प्रभावित क्षेत्रों में अभी और शव मिल सकते हैं। हालांकि, आपदा से हुई कुल क्षति और अंतिम मृतक संख्या का आकलन बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 355 शव चितवन जिले से बरामद किए गए हैं। चितवन इस आपदा से प्रभावित प्रमुख जिलों में शामिल है।
इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 218 शव बरामद होने की जानकारी दी गई है। वहीं नवलपरासी वेस्ट से 208 शव बरामद किए गए हैं। इनमें भारत से बरामद किए गए 18 शव भी शामिल हैं, जिन्हें नवलपरासी वेस्ट प्रशासन को सौंपा गया।
इसके अलावा नुवाकोट से 177 शव बरामद किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बाढ़ और उससे जुड़ी तबाही का असर नेपाल के कई जिलों में व्यापक स्तर पर हुआ है।

रसुवा, गोरखा और धादिंग में भी भारी नुकसान
नेपाल पुलिस के अनुसार, रसुवा जिले से 127 शव, गोरखा से 69 शव, धादिंग से 60 शव और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।
इन जिलों में भी बचाव और तलाशी अभियान लगातार जारी है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य करना टीमों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
कई जगहों पर बाढ़ के तेज बहाव और मलबे ने रास्तों को प्रभावित किया है। ऐसे में बचाव दलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने और संभावित पीड़ितों की तलाश करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

4,875 लोग अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे चिंताजनक पहलू बड़ी संख्या में लोगों का अभी तक लापता होना है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 4,875 लोगों के लापता होने का अनुमान है।
लापता लोगों के परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कई परिवार अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं, जिन परिवारों को अब तक अपने प्रियजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है, उनके लिए हर गुजरता दिन बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
बचाव दलों की प्राथमिकता अब भी लापता लोगों की तलाश करना है। इसी वजह से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

नौवें दिन भी जारी रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दलों ने गुरुवार को भी राहत और बचाव अभियान जारी रखा। यह अभियान आपदा के बाद नौवें दिन भी जारी रहा।
रेस्क्यू टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर लोगों की तलाश की जा रही है। जहां जरूरत है, वहां राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है।
बचाव अभियान में सेना और अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण अभियान को लगातार जारी रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत से भी बरामद हुए 18 शव
नेपाल पुलिस द्वारा जारी जानकारी में यह भी बताया गया है कि भारत से 18 शव बरामद किए गए, जिन्हें नवलपरासी वेस्ट को सौंप दिया गया।
यह जानकारी इस बात को दिखाती है कि आपदा का प्रभाव केवल नेपाल के एक सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा, बल्कि बाढ़ के तेज बहाव के कारण शव अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंच गए।
शवों की पहचान और उन्हें संबंधित परिवारों तक पहुंचाना प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे मामलों में अधिकारियों को पहचान की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंपने की कार्रवाई करनी होती है।

प्राकृतिक आपदा ने मचाई भारी तबाही
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित किया है। बाढ़ के तेज बहाव के कारण कई इलाकों में घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
जिन इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा पहुंचा, वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई परिवारों के सामने अब रहने, भोजन और दूसरी आवश्यक सुविधाओं की समस्या खड़ी हो गई है।
आपदा के बाद राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। वहीं, बचाव दलों का ध्यान उन लोगों की तलाश पर है जो अभी तक लापता हैं।

परिवारों में अपनों को लेकर बढ़ी चिंता
करीब 4,875 लोगों के लापता होने की जानकारी ने प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। कई परिवार लगातार राहत एवं बचाव दलों से अपने परिजनों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
जिन लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, उनके परिवारों के लिए भी यह समय बेहद दुखद है। वहीं, जिन लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, उनके परिवार अनिश्चितता के बीच इंतजार कर रहे हैं।
प्रशासन के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं—लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान, प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करना।

रेस्क्यू अभियान से उम्मीदें कायम
हालांकि आपदा को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संयुक्त बचाव दलों ने तलाशी अभियान जारी रखा है। प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
लापता लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए आने वाले दिनों में भी राहत और बचाव अभियान जारी रहने की संभावना है। हर बरामद शव के साथ जहां मृतकों की संख्या बढ़ रही है, वहीं बचाव दल अब भी संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटे हैं।
नेपाल के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती आपदा से प्रभावित लोगों को राहत देना और लापता लोगों का पता लगाना है।

नेपाल में आपदा का दर्द अभी जारी
नेपाल में आई इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। मौतों का आंकड़ा 1,252 पहुंच चुका है और 4,875 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धादिंग और तनहूं सहित कई जिलों से शव बरामद किए गए हैं।
नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल नौवें दिन भी तलाशी अभियान में जुटे हुए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में बचाव अभियान के दौरान कितने और लोगों का पता चलता है और आपदा से हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है।
