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✍ Aslam Ansari◷ 12 Oct 2026, 01:17 PM⏱ 4 min read◉ 219 views
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सड़कों पर आवारा पशुओं का दर्दनाक मंजर, आखिर कब जागेगा प्रशासन?

 

सोशल मीडिया पर सामने आने वाले आवारा पशुओं से जुड़े दर्दनाक दृश्य एक बार फिर उनके संरक्षण और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। वायरल वीडियो की जगह की पुष्टि नहीं है, लेकिन इसमें उठाया गया मुद्दा आम लोगों और पशुओं दोनों की सुरक्षा से जुड़ा है।

 

सड़कों पर बेसहारा घूमते पशु केवल यातायात में बाधा नहीं बनते, बल्कि कई बार उनके जीवन पर भी संकट मंडराता रहता है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर घूमने वाले गोवंश और अन्य आवारा पशु दुर्घटनाओं का शिकार हो सकते हैं। वहीं, अचानक सड़क पर पशु आ जाने से वाहन चालकों और राहगीरों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

इस तरह की घटनाएं पशु संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पशुओं को सड़कों पर छोड़ देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पशुओं की देखभाल के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और नियमों के अनुसार उनकी जवाबदेही तय हो।

 

यदि किसी पशुपालक ने अपने पशुओं को लावारिस छोड़ दिया है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, जिन पशुओं का कोई संरक्षक नहीं है, उनके लिए पर्याप्त क्षमता वाली गौशालाओं और पशु आश्रय स्थलों में सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहां चारा, पानी, छाया, उपचार और नियमित देखभाल की सुविधाएं उपलब्ध होना भी जरूरी है।

 

स्थानीय निकायों और प्रशासन को सड़कों पर घूमने वाले पशुओं की समस्या के समाधान के लिए नियमित अभियान चलाने चाहिए। दुर्घटना संभावित मार्गों, बाजारों और व्यस्त सड़कों पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ गौशालाओं की वास्तविक स्थिति और उनकी क्षमता की भी समीक्षा होनी चाहिए।

 

इस समस्या के समाधान में आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि कहीं कोई पशु घायल अवस्था में दिखाई दे या सड़क पर दुर्घटना का खतरा पैदा कर रहा हो, तो संबंधित स्थानीय निकाय या पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दी जा सकती है। हालांकि, पशुओं को पकड़ने या उन्हें हटाने का काम प्रशिक्षित और अधिकृत कर्मियों की मदद से ही किया जाना चाहिए।

 

फिलहाल, वायरल वीडियो की जगह और घटना की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे किसी विशेष शहर या प्रशासन से जोड़ना उचित नहीं होगा। लेकिन इससे उठने वाला सवाल महत्वपूर्ण है—आखिर कब तक सड़कों पर बेसहारा पशुओं और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा? जरूरत केवल बयान देने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिसमें पशुओं को सुरक्षा मिले और लोगों का जीवन भी सुरक्षित रहे।

Aslam Ansari
लेखक / संवाददाता

Aslam Ansari

Hind Ka Paigam के लेखक और समाचार संवाददाता द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट।

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